काशी के प्रसिद्ध औघड़ संत पूज्य औघड़ भगवान राम जी ,जिनसे आशीर्वाद लेने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ,इंदिरा गांधी , चंद्रशेखर सिंह ,मोरारजी देसाई तथा मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव आदि ,कैबिनेट मंत्री ,राज्य मंत्री तक आते थे।

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 आज आपको ऐसे गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके शिष्य इंदिरा गांधी से लेकर मुलायम सिंह तक रहे। ये लोग बाबा से आशीर्वाद लेने आते थे।बाबा अपने बाघ ‘रावल’ को बहुत प्यार करते थे। वह 24 घंटे उन्हीं के साथ रहता था और गोद में खेलता था। उनका चहेता एक कुत्ता भी था, जिसे वह ‘न्याय’ कहकर बुलाते थे।15#साल_की_उम्र_में_पहुंचे_काशीबाबा का जन्म 12 सितंबर 1937 को बिहार के गुंडी ग्राम मेंहुआ था। पिता बैजनाथ सिंह और माता का नाम लखराजी देवी था। ये अपने माता पिता की इकलौती संतान थे। पांच साल की उम्र में ही पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद दादा ने परवरिश की।सात साल की उम्र में ही सांसारिक माया से मन उखड़ जाने पर बाबा पैदल ही तीर्थयात्रा पर निकल पड़े और जगन्नाथपुरी पहुंच गए। कुछ दिन वहां रहने के बाद फिर अपने गांव वापस आ गए। ईश्वर में आस्था देख परिवार वालों ने गांव में ही एक मंदिर बनवा दिया, जिसमे बाबा ने शिवलिंग स्थापित किया। 15 साल की उम्र में बाबा अदृश्य शक्ति की खोज में बनारस आ गए और काशी विश्वनाथ दरबार का पता पूछते हुए वहां पहुंच गए। यहां से उन्हें रविंद्रपुरी स्थित कीनाराम मठ का पता चला तो वहां पहुंचे और अघोर दीक्षा लेकर तप साधना में कई साल बिताए। यहां से साधना के बाद उन्होंने मंडुवाडीह में सर्वेश्वरी आश्रम की नींव रखी। धीरे-धीरे समाज में बढ़ते अपने प्रसार को देखते हुए पड़ाव आश्रम की स्थापना की और यहीं पर कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए कुष्ठ आश्रम की स्थापना की, जिसका उद्घाटन तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई ने किया था। समाज की सेवा के लिए उन्होंने सर्वेश्वरी समूह की स्थापना की। अपने जीवनकाल में ही उन्होंने वर्तमान पीठाधीश्वर संभवराम को बाल्यावस्था में ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। बाबा की मृत्यु 29 नवंबर 1992 में मैनहट्टन, न्यूयार्क में हुआ।इंदिरा गांधी से मुलायम तक भक्तों में थे शामिलबाबा ने समाज के बहिष्कृत तबके कुष्ठ रोगियों के लिए कुष्ठ सेवा आश्रम की भी स्थापना की, जो आगे चलकर देश का सबसे बड़ा कुष्ठ आश्रम साबित हुआ। यहां से लाखों कुष्ठ रोगियों को रोग से निजात मिली। बाबा के समय आने वालों में पंडित जवाहर लाल नेहरू, मोरारजी देसाई, इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर सिंह, डॉ कर्ण सिंह, जगजीवन राम, राजनारायण, वीरबहादुर सिंह, कमलापति त्रिपाठी, शरद पवार, मुलायम सिंह यादव सहित दर्जनों केंद्रीय और राजयमंत्री के पूर्व प्रधानमंत्री बीपी कोइराला, मॉरिशस के उच्चायुक्त घरभरनजी उनके भक्तों में शामिल थे।#तीन_बार_इंदिरा_गांधी_से_मिलने_से_किया था इनकारबाबा के भक्तों की मानें तो वह जितने दयालु थे, उतना ही अपने समाज की भलाई के लिए लोगों से नाराज भी होते थे। मुलायम सिंह यूपी के सीएम थे, इस दौरान अयोध्या में कार सेवकों पर गोली बरसाई गई थी। इस बात से बाबा बहुत नाराज थे। चन्द्रशेखर सिंह के साथ मुलायम सिंह बाबा से मिलने पहुंचे, लेकिन बाबा ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था। इसी तरह तीन बार बाबा ने इंदिरा गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था। चौथी बार उन्होंने इंदिरा से मुलाकात की। बताया जाता है कि बाबा बहुत बड़े भविष्यवक्ता भी थे। जिस दिन इंदिरा गांधी की हत्या हुई, उस दिन सुबह ही बाबा ने अपने खास लोगों से देश में बहुत बड़ा अनिष्ट होने की आशंका व्यक्त की थी। बाबा चंद्रशेखरजी को बहुत मानते थे। केंद्रमें बहुत उथल-पुथल मचा था। चंद्रशेखर सिंह सात दिनों से बाबा से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाबा उनसे आठवें दिन मिले और बोले कि तुम यहां क्या कर रहे हो, दिल्ली जाओ, वहां तुम्हारी आवश्यकता है। इसके बाद चंद्रशेखर दिल्ली केलिए चले। रांची एयरपोर्ट पर मीडिया ने उन्हें घेर लिया और सूचना दी कि आप हैं कहां, आपका नाम प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित हो रहा है।

हिमांशु सिंह (राज्य डिप्टी ब्यूरो चीफ उ०प्र०)