कौशांबी के पूर्व एसपी प्रदीप गुप्ता व पूर्व मंझनपुर इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने 15 फरवरी को कोर्ट में किया तलब

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यूपी के कौशांबी में दलित महिला से दुष्कर्म के एक मामले में मुकदमा न दर्ज किए जाने पर नाराज़गी जताते हुए विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट रमेश यादव ने पूर्व एसपी प्रदीप गुप्ता और पूर्व मंझनपुर इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह को तलब करते हुए प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को पत्र भेजा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है क्यो न पूर्व एसपी प्रदीप गुप्ता व पूर्व मंझनपुर इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट (अत्याचार निवारण) नियम 1955 में वर्णित नियम 5 तथा एससी-एसटी एक्ट (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा-4 में वर्णित विधि व्यवस्था के प्रतिलंघन में पूर्व एसपी व पूर्व थाना प्रभारी के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद पंजीकृत करके दाण्डिक कार्यवाही हेतु अग्रिम आदेश दिया जाए।

कोर्ट ने 15 फरवरी को पूर्व एसपी प्रदीप गुप्ता व पूर्व मंझनपुर इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह को स्वतः उपस्थित होकर पीड़िता की शिकायत पर कार्यवाही न करने का कारण स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही यह भी पूंछा कि क्यो न उक्त अफसरों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में उनके विरुद्ध दाण्डिक कार्यवाही अमल में लाई जाय।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आदेश की कॉपी प्रमुख सचिव गृह यूपी व डीजीपी यूपी को सूचना एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी जाय। ताकि भविष्य में एससी-एसटी एक्ट के मामले में प्रदेश में कार्यवाही में लापरवाही न बरती जाए और पीड़ित को कार्यवाही के बाबत अदालत में न आना पड़े। जिससे अदालत का बहुमूल्य समय बचे।

कोर्ट ने मामले का निस्तारण करते हुए मौजूदा एसपी अभिनंदन ने न्यायालय के 18 जनवरी 2020 के आदेश को प्रसंज्ञान में लेकर पीड़िता के प्रार्थना पत्र पर 1 फरवरी 2020 को मुकद्दमा अपराध संख्या 42/2020 में आईपीसी की धारा 376, 504,506 व धारा 3 (1) 10 एससी-एसटी एक्ट में अभियुक्त अजय कुमार मौर्य व 4 अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कार्यवाही को प्रसंशा के योग्य बताया है।

बतादे कि अगस्त माह 2019 में मंझनपुर इलाके की एक दलित महिला से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पीड़िता के शिकायत के बावजूद भी पूर्व मंझनपुर इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह ने मुकदमा नही दर्ज किया था। जिसके बाद पीड़िता ने पूर्व एसपी प्रदीप गुप्ता से मिलकर भी इंसाफ की गुहार लगाई थी। लेकिन पूर्व एसपी ने भी पीड़िता भी फरियाद को दरकिनार कर दिया था। जिसके बाद पीड़िता ने धारा 156 (3) के तहत अपना प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया। और जब कोर्ट ने घटना के सम्बंध में थाना मंझनपुर प्रभारी निरीक्षक से रिपोर्ट मांगी तो पुलिस ने पीड़िता का मुकदमा दर्ज कर कोर्ट को रिपोर्ट भेजी।