कौशांबी पुलिस ने झूठे मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार को अरेस्ट कर हवालात में डाला, पत्रकारों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से लगाई न्याय की गुहार

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उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में पुलिस उत्पीड़न के चलते पत्रकार सुरक्षित नही है। एक के बाद एक अब तक आधा दर्जन से अधिक पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। शुक्रवार की दोपहर मंझनपुर कोतवाली पुलिस ने फिर से एक झूठे मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार को गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया है। जिसके बाद पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है।

जानकारी के मुताबिक 7 अक्टूबर 2019 को मंझनपुर कोतवाली पुलिस ने गुफरान अली के तहरीर पर एक कथित ऑडियो को आधार बनाते हुए ZEE NEWS के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार, TV 100 के पत्रकार जिया रिजवी व एक प्रतिष्ठित अखबार के स्थानीय पत्रकार गुलाम वारिश के खिलाफ 50 हजार रुपये रंगदारी मांगने के आरोप में आईपीसी के धारा 386 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

बतादे की खबरों के द्वेषभावना के चलते इंस्पेक्टर मंझनपुर उदयवीर सिंह ने जिस वादी मुकदमा गुफरान अली के तहरीर पर पत्रकारों के खिलाफ झूठा केस दर्ज किया था दरअसल वह एक युवती से छेड़खानी का अभियुक्त था। जिसका छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो पर कार्यवाई न होने पर पत्रकार अजय कुमार ने ZEE NEWS पर प्रमुखता से खबर दिखाया था। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी जी ने पुलिस अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी।

अपर मुख्य सचिव गृह के फटकार के बाद मंझनपुर पुलिस ने युवती से छेड़खानी के आरोपी गुफरान अली की पहचान करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। और उसे जेल भेजते समय द्वेषभावना के चलते वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार समेत तीन लोगों के खिलाफ झूठी तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कर दिया। जब प्रेस क्लब के सदस्यों ने पत्रकार उत्पीड़न का विरोध किया तो डीएम मनीष कुमार वर्मा ने मामले में एडीएम को जांच के निर्देश दिए। मजिस्ट्रेट के जांच के दौरान वादी मुकदमा गुफरान अली ने शपथपत्र देकर पत्रकारों पर लगाये गए सभी आरोपो को एकदम असत्य एवं निराधार बताया। उसने शपथपत्र में लिखा कि किसी के बहकावे में आकर पत्रकारों के खिलाफ पुलिस को झूठी तहरीर दी थी।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के तुरंत बाद पत्रकार गुलाम वारिश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जब मजिस्ट्रेट के विचाराधीन जांच के दौरान शुक्रवार की दोपहर मंझनपुर पुलिस ने पत्रकार अजय कुमार को भी अरेस्ट कर हवालात में डाल दिया। गौरतलब ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस ने वादी मुकदमा के द्वारा दिये गए शपथपत्र को भी दरकिनार ही नही किया, बल्कि कथित ऑडियो का बिना परीक्षण कराये ही अपनी मनमानी कार्यवाई करती रही। पत्रकारों से द्वेषभावना के चलते पुलिस ने सारे नियम कानून को भी ताक पर रख दिया। तहरीर के मुताबिक पुलिस ने सम्बंधित धाराओं में मुकदमा न दर्ज करने के बजाए मनमानी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

पत्रकार अजय कुमार के गिरफ्तारी के बाद जिले के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है। फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ समेत यूपी के कई जनपदों के पत्रकार संगठनों ने पुलिस कार्यवाई की निंदा करते हुए धरना प्रदर्शन किए जाने की बात कही है। वहीं इस पुरे मामले में पत्रकारों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र भेजते हुए कौशांबी पुलिस द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न से न्याय की गुहार लगाई है।