पांच दिवसीय लक्षाहुति अंबा महायज्ञ के लिए किया गया जल एवं भूमि पूजन ।

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बिहार संवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट

प्रखंड क्षेत्र के जगमोहरा में कमला ,कोसी,बागमती,नदी के त्रिवेणी संगम स्थल पर पांच दिवसीय लक्षाहुति अंबा महायज्ञ के लिए किया गया जल एवं भूमि पूजन ।कार्यक्रम शुभारंभ श्री श्री 108 शवामी चिदात्मन महराज ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया।बताते चलें कि आज दिनांक 7/1/ 2020 दिन मंगलवार को लाक्षाहुती आंबा महायज्ञ को लेकर स्वामी श्री श्री 108 चिदात्मन जी महाराज द्वारा शोभायात्रा निकाला गया ।शोभायात्रा पंचवटी चौक ठठेरबा से होते हुये जगमोहरा गाँव भर्मण कर त्रिवेणी संगम स्थल पर पहुचकर जल एवं भूमि पूजन किया गया।बताते चलें कि जगमोहरा त्रिवेणी संगम तट स्थल जो कि कमला कोसी बागमती तीनों नदियों का संगम तट है एवं तीनो जिला का सिमा भी है।समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा ,वही पूज्य गुरुदेव श्री चिदात्मन महाराज द्वारा त्रिवेणी संगम स्थल के बारे आध्यत्म से जुड़ी बातो की जानकारी दी ।मिथिलान्तर्गत सर्वमंगला अधात्मयोग विधपिद्धान्तर्गत दुआदस कुम्भ के साथ साथ तीन कुम्भ निदान प्रस्तुत किया गया है।यथा अग्रहन में नारायणी (गंडकी ,गंगा)गंगा संगम हरिद्वार क्षेत्र ,पौष में कमला कोसी ओर बागमती ,(लक्ष्मी ,काली ,सरस्वती)मिलान स्थली संगम तट जगमोहरा औऱ माघ मास में नारायणी (गंडकी)स्वर्ण भद्रा ताम्र भद्रा संगम वाल्मिकी नगर अदभुद तपस्थली है।अर्थात भगवान वेद शास्त्रों के अनुसार 07/10/24 ईसवी पूर्व में वर्णन आता हैं।कि कौसकी नदी का तट विस्वामित्र की कठौर तपस्थली स्थल रही है।जो व्यक्ति पूरे मास यदि स्नान नहीं किया ।परन्तु केवल पौष मास के पूर्णिमा के दिन में जो स्नान कर लिया तो उस व्यक्ति को सारा पापो से मुक्ति से मुक्ति मिल जाता है।अतः पौष पूर्णिमा के दिन 10 से लेकर 15 जनवरी 2020 तक जगमोहरा त्रिवेणी स्थल पर कुम्भ स्नान का योग लिख रहा है।जो उत्तम माना गया है।मौके पर घनश्याम कुमार ,कौशलेंद्र कुमार,राजीव सिंह लक्षण ,नृपेनदानन्द, नारायण
झा ,रामशंकर झा ,शम्भू मिश्र, अमन कुमार सिंह ,दिनेश कुमार सिंह ,स्वामी रविन्द्र ब्रह्मचारी ,स्वामी सत्यान्द जी प्रोफेसर पीo केo झा, प्रेम,विजय कुमार,नीलमणी ,दिनेशचंद,राजकिशोर,समस्त जगमोहरा ग्रामवासी उपस्थित थे।