राज्यपाल के अभिभाषण पर अखिलेश यादव ने कसा तंज, बोले अच्छा होता CAA के विरोध में उतरी महिलाओं के उत्पीड़न का भी जिक्र कर लेतीं राज्यपाल महोदया

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान जारी करते हुए कहा है कि राज्य विधानमण्डल के एक साथ दोनों सदनों के समक्ष महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जो अभिभाषण दिया है. वह पूर्णत: दिशाहीन और सत्य को मारने वाला है. प्रदेश के विकास का इसमें कोई रोडमैप नहीं दिखाई देता है. जबकि विकास के नाम पर भाजपा अपनी एक भी योजना तीन साल में लागू नहीं कर सकी है. समाजवादी सरकार के कामों पर ही अपना नाम लगाना उसका एक मात्र विकास कार्य है.

अखिलेश ने कहा कि अच्छा होता राज्यपाल महोदया प्रदेश में सीएए के विरोध में उतरी महिलाओं पर भाजपा सरकार द्वारा बर्बर उत्पीड़न का भी जिक्र कर लेती और बच्चियों के साथ बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर अपना रोष भी व्यक्त कर देती. जबकि प्रदेश में अहिंसा की हत्या की जा रही है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि यदि सरकारी अभिभाषण में किसानों, नौजवानों के लिए किए गए तमाम दावों में तनिक भी दम है तो किसान बदहाली में आत्महत्या क्यों करते, नौजवान बेरोजगारी की मुसीबत में क्यों होते. पिछड़ों, दलितों के साथ हमदर्दी होती तो आरक्षण खत्म करने की साजिश क्यों हो रही है. सीएए, एनपीआर और एनआरसी के बहाने समाज में नफरत फैलाने की कुचेष्टा क्यों हो रही है. क्या सबका विश्वास ऐसे ही हासिल होगा?

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव में ने आगे कहा, ‘यह कौन नहीं जानता कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के समय-अपराध बढ़े हैं. हत्या और बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ आ गई है. जबकि फर्जी एनकाउंटरों पर सरकार को जवाब देना पड़ रहा है. मानवाधिकार उल्लंघन पर राज्य सरकार को नोटिस मिल रहे हैं. भाजपा नेताओं और अपराधियों की साठगांठ के चलते प्रदेश में भय का वातावरण है. अभिभाषण के दौरान ही आज राजधानी की एक अदालत में देशी बम से हड़कम्प मच गया. जाहिर है कानून व्यवस्था राज्य सरकार के कितने नियंत्रण में है.

यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि हकीकत में भाजपा सरकार के विरूद्ध हर तरफ आक्रोश और निराशा है. राज्य में जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदतर हालत हैं. यही नहीं, बिजली संकट है. निवेश के नाम पर सिर्फ समझौता पत्रों पर ही हस्ताक्षर होते हैं. एक भी उद्योग भाजपा राज में नहीं लगा है. बिजली की एक यूनिट का भी उत्पादन नहीं हुआ है. सड़के गड्ढे से भरी हैं. छात्र-छात्राओं को जूते-मोजे-स्वेटर तथा किताबें तक समय से मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं.