रोसडा़ प्रखंड में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कागज के पन्नों पर कई वर्षों से चल रहा है।

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बिहार संवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट:-

बिहार सरकार स्वास्थ्य विभाग को लेकर भले लाख दावा कर ले लेकिन उनकी योजना आज भी कागज के पन्नों पर ही चल रहा है ।बिहार सरकार द्वारा हर वर्ष कई करोड विभाग  के जरिए खर्च कर रही है।
लेकिन कागज के पन्नों पर चलने वाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी वैसे बंद पड़ी हुई है।
रोसड़ा प्रखंड में जितना भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है उसमें एएनएम एवं नर्स की बहाली हुई है सभी कागज के पन्नों पर ही हुआ है आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए जो भी दवाइयां आती है वो सिर्फ कागज के टुकड़ों तक ही सिमट कर रह जाती है जिस भी जगह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रही है वहां पर उस प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में नहीं दवाइयों की व्यवस्था है ना ही एएनएम एवं नर्स उपलब्ध रहती है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद रहने के कारण उस क्षेत्र के लोग इलाज करवाने हेतु वहां पहुंचते तो है लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बंद उदास होकर उन्हें बैरंग होकर लौटना पड़ता है अगर उन्हें इलाज करवाना हो तो अनुमंडलीय अस्पताल रोसड़ा की तरफ रुख को मोड़ना होता है अगर स्वास्थ्य उपकेंद्र चालू अवस्था में मिले तो लोगों की सारी परेशानियां दूर हो जाएगी और वहां गए लोगों की बेहतर इलाज हो पाएगा।
सरकार की यह झूठा एवं खोखला दावा इसलिए कागज के पन्नों पर सिमट गया है नाही स्वास्थ्य विभाग इन स्वास्थ्य केंद्र को देखरेख करते हैं ना ही उन में कार्यरत एएनएम या नर्स की रिपोर्ट लेती है।
बता दे कि जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी से दूरभाष पर बात करने की प्रयास किया गया तो उनकी फोन नहीं लगने के कारण उनकी पक्ष को नहीं रखा गया।