सजायाफ्ता कैदी मुन्ना की इलाज के दौरान मौत

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कौशांबी के जिला कारागार में हत्या के आरोप में बंद एक सजायाफ्ता कैदी की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। खबर मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

कौशांबी जिला कारागार में बंद कैदी मुन्ना सिंह कोखराज थाना क्षेत्र के कशिया पूरब गांव का रहने वाला था। वह अपनी बहन के ससुर की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। तीन दिन से कैदी मुन्ना की तबीयत खराब थी। जिला कारागार अस्पताल से ही उसकी दवाएं चल रही थी। रविवार को कैदी की सांस फूलने और पेट मे सूजन की शिकायत बढ़ी तो कारागार के चिकित्सा अधीक्षक ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिसके बाद जेल प्रशासन ने कैदी के परिजनों को मामले की सूचना देते हुए उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान आधा घंटे के भीतर ही कैदी की मौत हो गई।

जिला अस्पताल पहुंचे परिजन को जब स्टेचर पर पड़ी कैदी की लाश मिली तो वह दहाड़े मारकर रोने लगे। परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। किसी तरह पुलिस के समझाने पर वह शांत हुए। जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर अरविंद कनौजिया के मुताबिक कैदी मुन्ना को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसके पेट में सूजन गैस के कारण थी। संभवता उसकी मौत हार्ट अटैक से हो सकती है, लेकिन मौत की स्पष्ट वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।

मृतक कैदी की पत्नी शोभा देवी के मुताबिक उसकी पति की तबीयत काफी दिनों से खराब थी। जानकारी होने पर वह जिला कारागार में उससे मिलने भी गई थी। तभी बाहर से इलाज करवाने के लिए उन्होंने जेल प्रशासन से गुहार लगाई थी। लेकिन जेल प्रशासन ने उसकी एक भी न सुनी, और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। अगर समय रहते जेल प्रशासन उसके पति का बाहर से उपचार करवाते तो शायद आज उनकी मौत न होती। परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग की है।