आधा दशक बाद रौद्र हुई यमुना नदी* *बाढ़ से हो रहा है ग्रामीणों को भारी नुकसान* *विधायक घाटमपुर ने किया नाव से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण

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*आधा दशक बाद रौद्र हुई यमुना नदी*

*बाढ़ से हो रहा है ग्रामीणों को भारी नुकसान*

*विधायक घाटमपुर ने किया नाव से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण

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कानपुर घाटमपुर सजेती इस वक्त यमुना नदी उफान पर है जहां शुक्रवार को यमुना का खतरे के निशान 105.110 पर है. वहीं सामान्य जलस्तर 103. 632 मीटर ही है. तहसील क्षेत्र में यमुना किनारे बसे करीब 18 गांव इस समय खतरे पर है. पिछले 50 वर्षों में बाढ़ का यह खतरनाक रुप पहली बार देखा गया है. इसके पहले सन 1982 और 1996 में आई बाढ़ ने इतना नुकसान नहीं किया था .जितना इस वर्ष आई बाढ़ कर रही है .जहां 18 गांव की आबादी लाखों का नुकसान झेल रही है. वही लगातार बढ़ रहा पानी लोगों की धड़कनें तेज कर रहा है. ऐसा भी नहीं है कि बाढ़ खत्म हो और सब कुछ सही हो जाएगा. असली बर्बादी की तस्वीर तो बाढ़ खत्म होने के बाद पानी उतरने के समय ही नजर आएगी. पानी अभी बढ़ रहा है और लोगों के घर गिरने शुरू हो गए. गड़ाथा गांव में छोटे सिंह, जगत सिंह, सत्येंद्र सिंह, मोनू सिंह के मकान की दीवाले गिरना शुरू हो चुकी है. तथा गांव के सात मोहल्लों में पानी भरा हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार यमुना किनारे के कई आबादी के घरों में 10 फीट से ज्यादा पानी भर चुका है और ग्रामीणों की गृहस्थी यमुना नदी के हवाले है .बाढ़ के खतरनाक रूप को देखते हुए घाटमपुर तहसील प्रशासन द्वारा समस्त तटवर्ती क्षेत्रों में 16 बाढ़ चौकियों के सहारे निगरानी की जा रही है. जहां पर कर्मचारियों को तैनात किया गया है. प्रशासन द्वारा हरदौली, काटर, अकबरपुर बीरबल, गड़ाथा, कटरी, कोटरा,मऊनखत यमुना तटवर्ती गांव में चौकियां स्थापित की गई है . रिन्द नदी को देखते हुए बरनाव, जगदीशपुर, पडरी लालपुर व रामपुर में भी बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है. तहसील में नोन नदी में बाढ़ को देखते हुए गांव बेंदा, निमधा, हरबसपुर, बरीपाल, नंदना में भी बाढ़ चौकियां बनाई गई है .जिनमें नियुक्त कर्मचारी दिन-रात स्थितियों पर नजर रखते हुए अधिकारियों को जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे. ग्रामीणों के अनुसार यमुना तटवर्ती गांव में सन 1971 में इतनी भयंकर बाढ़ आई हुई थी. उस वक्त जहां ग्रामीण क्षेत्रों में ना ही कितनी आबादी थी और ना ही इतने संसाधन थे. इस वजह से बाढ़ से नुकसान भी कम हुआ था. परिस्थितियां आज उसके उलट है. जहां आज संसाधन आबादी बढ़ी हैं तो सुविधाएं आबादी और संसाधन के हिसाब से कम ही नजर आ रहे हैं. हालांकि प्रशासन अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को अपने स्तर से काबू करने की कोशिश में लगा हुआ है. यमुना तटवर्ती गांव में आई बाढ़ से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है .वहीं क्षेत्र के लगभग 8 से 10 गांव में पानी घुसने की कगार पर है. वहां लोग पलायन करने को मजबूर हैं. तहसील क्षेत्र के मऊनखत ,गडाथा के रास्ते पूर्णतया बंद हो चुके हैं .रास्तों में पानी भर जाने से लोग नाव का सहारा लेने पर मजबूर हैं. वहीं प्रशासन द्वारा नाव की संख्या कम होने के चलते लोग स्थानीय मछुआरों के नाव से पैसे देकर निकलने को मजबूर हैं. गडाथा गांव में विद्युत तार भी लोगों को के ऊपर खतरा बनकर मटरा रहे हैं. ढीले तारों की वजह से यमुना के जलस्तर और तारों की दूरी बेहद कम रहे चुकी है. प्रशासन को ऐतिहातन सप्लाई बंद करनी पड़ी है. जिससे सूखे क्षेत्र में रहने वालों को रात में और ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. जहां उन्हें रात के अंधेरे में विभिन्न प्रकार के जीव जंतुओं से अपने आप की रक्षा करनी पड़ेगी .वहीं विद्युत सप्लाई कब शुरू होगी इसकी भी कोई उम्मीद नहीं है।.
कानपुर घाटमपुर से संवाददाता अंकित कुशवाहा की रिपोर्ट

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