आस्था का प्रतीक बन रहा अंजान बाबा पेड़

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*आस्था का प्रतीक बन रहा अंजान बाबा पेड़

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कानपुर साढ़ थाना क्षेत्र के दौलतपुर और गोपालपुर गांव के बीच खेतों में लगा 1 पेड़ इन दिनों श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र बनता नजर आ रहा है. जहां ग्रामीणों के अनुसार उस पेड़ में प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो रही है. वही ग्रामीणों ने बताया कि पेड़ के पत्ते से निकलने वाले दूध से लोगों के चर्म रोग, सफेद दाग जैसे गंभीर रोग सही हो रहे हैं. हालांकि पेड़ इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. बता दें साढ़ं थाना क्षेत्र के दौलतपुर व गोपालपुर के बीच एक विशालकाय पेड़ जिसका तना अजीब सी आकृतियां लिए हुए हैं. आस्था का केंद्र बना हुआ है. लोगों के अनुसार उसमें किसी दिव्य शक्ति का प्रवेश है. जिससे श्रद्धा पूर्वक आने वाले लोगों के बहुत से कष्ट लगातार दूर हो रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि पेड़ से निकलने वाला दूध रात के 12 से सुबह सूर्योदय के पहले भारी मात्रा में निकलता है .इसी दौरान लोगों की भीड़ इस पेड़ के आसपास इकट्ठा होती है. जो लोग इस पेड़ के पत्ते का दूध निकाल कर अपने चर्म रोग, सफेद दाग व अन्य रोगों में इस्तेमाल करते हैं. उनके रोग हफ्ते भर में कम हो जाते हैं. ऐसा ग्रामीण बताते हैं .जिससे पेड़ में लोग अब पूजा-पाठ भी करने लगे हैं एवं उसके दर्शन से दूर दूर से लोग आने लगे हैं. जिससे सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन लोग पेड़ के दर्शन व पेड़ के दिव्य दूध को लेने आते हैं. गोपालपुर गांव के ही निवासी सुरजन शुक्ला ने बताया कि इस पेड़ के बारे में पहले लोगों को कुछ नहीं पता था. बाद में रावतपुर से 2 दिव्यांग लड़कियां यहां पर आई. जिन्होंने यहां पर झंडा गया लगाया तो ग्रामीणों ने कारण पूछा. दिव्यांग लड़कियों द्वारा बताया गया कि उनके सपने में कोई दिव्य पुरुष आए थे. जिन्होंने यहां आने के लिए एवं इस पेड़ के दूध एवं छाल को अपने दिव्यांग अंगों में लगाने के लिए कहा था. जिसका उन्होंने यहां आकर पालन किया और हफ्ते भर बाद ही उन्हें आराम मिल गया. जिसके बाद वह श्रद्धा पूर्वक यहां पर आकर पूजा-पाठ व झंडा लगाने आए है. जिसके बाद धीरे-धीरे लोगों की आस्था पेड़ की तरफ बढ़ने लगी और लोगों को पेड़ के दूध से फायदा भी मिलने लगा. जिससे दिन पर दिन यहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी. वही सुरजन सिंह ने आगे बताया कि काफी वर्ष पहले यहां पर एक बाबा आए थे. जो कुछ दिन इस पेड़ के नीचे रुके थे. लोगों द्वारा बाबाजी का परिचय पूछने पर बाबा जी ने किसी को भी अपना परिचय नहीं दिया और वही पेड़ के नीचे बैठे साधना करते रहते थे .बाद में लोग उन्हें अनजान बाबा कहने लगे. कुछ दिन बाद बाबा जी वहां चले गए. बाद में जब रावतपुर गांव की लड़कियां उस पेड़ में झंडा लगाने आई.तब लोगों की पेड़ की विशेषता पता चली. जिसके बाद लोगों में आस्था बढ़ी और वहां पर धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी. आज ग्रामीणों के अनुसार स्थितियां यह है कि शनिवार व मंगलवार की रात के 12 बजे से लेकर सुबह 5बजे तक सूर्य उदय होने से पूर्व तक सैकड़ों लोगों की भीड़ पेड़ के पास इकट्ठा रहती है और पूजा-पाठ एवं पेड़ से निकलने वाले दूध को लोग अपने शरीर में लगाते देखे जा सकते हैं।.
कानपुर से जिला संवाददाता विक्रम सिंह की रिपोर्ट

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