उत्तर प्रदेश में 2 से ज्यादा बच्चे पैदा किए तो सरकारी सुविधाओं से रहोगे वंचित

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  1. पॉपुलेशन कंट्रोल बिल, 2021 में कहा गया है कि जिन माता-पिता को 2 से ज्यादा बच्चे हैं, उनसे कई प्रकार की सुविधाएं वापस ले लेनी चाहिए या नहीं दी जानी चाहिए. इन सुविधाओं में निम्नलिखित का जिक्र है-
    ऐसे परिवार के सदस्य को लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए
    दो से ज्यादा बच्चे वाले परिवार को राज्यसभा, विधान परिषद् और इस तरह की संस्थाओं में निर्वाचित या मनोनित होने से रोका जाना चाहिए
    ऐसे लोग कोई राजनीतिक दल नहीं बना सकते या किसी पार्टी का पदाधिकारी नहीं बन सकते
    प्रदेश सरकार की ए से डी कैटगरी की नौकरी में अप्लाई नहीं कर सकते
    इसी तरह, केंद्र सरकार की कैटगरी ए से डी तक में नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकते
    निजी नौकरियों में भी ए से डी तक की कैटगरी में आवेदन नहीं कर सकते
    ऐसे परिवार को मुफ्त भोजन, मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी जैसी सब्सिडी नहीं मिलनी चाहिए
    बैंक या किसी भी अन्य वित्तीय संस्थाओं से लोन नहीं प्राप्त कर सकते
    ऐसे लोगों को इनसेंटिव, स्टाइपेंड या कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलना चाहिए
    दो से ज्यादा बच्चों वाले परिवार के लोग कोई संस्था, यूनियन या कॉपरेटिव सोसायटी नहीं बना सकते
    ऐसे लोग न तो किसी पेशे के हकदार होंगे और न ही किसी कामकाज के
    वोट का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार और संगठन बनाने का अधिकार नहीं मिलेगा
    स्कूलों में जनसंख्या नियंत्रण की पढ़ाई
    जनसंख्या नियंत्रण बिल, 2021 के मुताबिक, हर प्रदेश सरकार अपने हिसाब से स्कूलों में जनसंख्या विस्फोट के खतरनाक प्रभाव और जनसंख्या नियंत्रण के फायदों के बारे में बताने के लिए जरूरी विषय पढ़ाने का प्रावधान करेंगे. हर महीने इन स्कूलों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े लेख प्रतियोगिता और वाद-विवाद आयोजित करने होंगे. बिल में कहा गया है कि जनसंख्या विस्फोट पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार नेशनल पॉपुलेशन स्टेबलाइजेशन फंड बनाएगी. इस फंड में केंद्र के बताए औसत के हिसाब से केंद्र और सभी राज्य सरकारें अपना अनुदान जमा कराएंगी. इस फंड का प्रबंध ऐसे रखना होगा कि जिस राज्य में गर्भधारण का अनुपात ज्यादा हो, उसे ज्यादा राशि जमा करने की जरूरत होगी. जिस राज्य में फर्टिलिटी रेट कम हो, उसे फंड में कम पैसे जमा कराने होंगे.
  2. केंद्र सरकार बनाएगी फंड!
    फंड में जमा पैसे राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में बांट दिए जाएंगे. इस बंटवारे का आधार पर जनसंख्या नियंत्रण ही होगा. उन राज्यों को इस फंड से औसतन ज्यादा पैसे मिलेंगे जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए ज्यादा काम किया हो या बड़े स्तर पर सुधार के कार्यक्रम चलाए हों. इस फंड में समय-समय पर केंद्र सरकार की ओर से राशि जमा की जाएगी और इसके लिए संसद के जरिये कोई कानून बनाया जाएगा. इस कानून के लागू होने के एक साल के भीतर सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारी लिखित में यह आश्वासन देंगे कि उनके दो बच्चों से ज्यादा नहीं होंगे. अगर किसी कर्मचारी को पहले से दो संतानें हैं, तो वे लिखित में देखें कि कोई तीसरा बच्चा नहीं होगा.
  3. नौकरी पर भी असर!
    जनसंख्या नियंत्रण बिल, 2021 के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारें जब कर्मचारियों की भर्ती करें तो वैसे लोगों को प्राथमिकता दें जिन्हें 2 या उससे कम बच्चे हैं. अगर किसी केंद्रीय या राज्य सरकार के कर्मचारी को पहले से 2 संतान हैं तो तीसरी संतान की अनुमति तभी मिलनी चाहिए जब दो में से कोई एक दिव्यांग हो. अगर केंद्रीय या राज्य सरकार का कर्मचारी जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करता है, तो उसे नौकरी से बर्खास्त करने का प्रावधान अमल में आना चाहिए.

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