कौशांबी कारखास– पुलिस स्टेशन के कालेधन का अर्थशात्री-भाग 3

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कौशांबी यूपी:- जनपद में “कारखासी” करने वाले पुलिस वालों में एक खास वर्ग पर स्टेशन अफसर भरोसा जताते है। इसके पीछे एक सोची समझी साजिश की संभावना कारख़ासी करने वाले पुराने लोग बताते है। कारख़ासी के लिए सबसे महत्वपूर्ण थानों में यादव बिरादरी के लोगो को ही वरीयता दी जाती है। प्रमाण के रूप में पिपरी, करारी, मंझनपुर, सैनी, कोखराज, कड़ाधाम, पूरामुफ्ती के कारखास लोगो को देखा जा सकता है।

जानकार बताते है कि ये कारखास पुलिस कर्मी अपने नेटवर्क का प्रयोग कर थाने की काली कमाई को बढ़ाते है। इतना ही नही किसी तरह से अवैध कमाई का ऑडियो या वीडियो बन कर वायरल हुआ तो अधिकारी कार्यवाही के दौरान शासन को यह बता कर पल्ला झाड़ते है कि सपा सरकार की मानसिकता के लोग है। सरकार को बदनाम करने की साजिस का हवाला देकर जाँच रिपोर्ट मनचाही भेजकर शासन की कार्यवाही से बचाते है।

कारख़ासी करने की आड़ में ये पुलिस वाले थाने के साहब की जेब तो भरते ही है , साथ ही बंदर बांट की आड़ में खुद भी काली कमाई से कुबेर बन जाते है। जिनके पास देखते ही देखते आलीशान भवन, रहन सहन, प्रोफ़ाइल, बन जाता है। थाने के कालेधन के अर्थशात्री कारख़ासी की कला में इतने निपुण होते है कि स्थानीय अवैध वसूली की शिकायतें यह अपने स्तर से ही निपटा देते है। मसलन यह स्थानीय पत्रकारो से सिस्टम बनाकर कार्यवाही से बच जाते है।