घाटमपुर के जहांगीराबाद गांव में भी 20 दिन में 25 से 30 लोगों की मौत

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*घाटमपुर के जहांगीराबाद गांव में भी 20 दिन में 25 से 30 लोगों की मौत

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कानपुर घाटमपुर परास गाव में मौतों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं है कि घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के ही जहांगीराबाद गांव में भी 20 दिन के अंदर 25 से 30 लोगों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है. देखने वाली बात है की परास गांव में हुई मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के सचेत ना होने के बाद कोतवाली क्षेत्र के दूसरे गांव जहांगीराबाद में इस तरह के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. कानपुर शहर के नौबस्ता चौराहे से 25 किलोमीटर दूर हाईवे के ऊपर घाटमपुर से कानपुर की तरफ 5 किलोमीटर दूर 1 किलोमीटर क्षेत्र में फैला गांव जहांगीराबाद. जहां आज स्थितियां परास से कहीं भी कम नहीं है. 6000 की मिश्रित आबादी का गांव जहांगीराबाद जहां अधिकतर घरों में बीमार लोग देखे जा सकते हैं. इसी गांव में बीते 20 दिन में 25 से 30 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. गांव के अधिकतर घरों में कोई न कोई व्यक्ति ट्रक चालक है .जहांगीराबाद गांव की स्थिति बात करें तो पत्रकार टीम देखते ही ग्रामीण अपने कटु अनुभव सुनाने लगे. ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने गांव में इतनी मौतों के बाद भी अभी तक गाँव एक नजर नहीं फेरी. गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ना ही तो सैनिटाइजेशन हुआ और ना ही चेकअप कैंप लगाया गया. गांव में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खंडहर में तब्दील हो चुका है. जब से बना है तब से उसमें ना तो डाक्टरों की नियुक्ति और ना ही कोई स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ ग्रामीणों को मिला. ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र बनने के कुछ दिन बाद मिस प्रयोग होने के चलते उसमें स्कूल चलने लगा. बाद में वह भी बंद हो गया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्रामीणों ने भूसा भर कर अपना ताला डाल दिया. इसे विडंबना ही कहे कि गांव में अधिकतर मौतें डॉक्टरों के आमानवीय चेहरे की वजह से हो रही है. व्यक्ति को कोविड है या नहीं यह मायने नहीं रखता. मौत का मुख्य कारण डाक्टरों द्वारा मरीज को ना देखना ही है. बीते दिन गांव में मृत्यु का शिकार हुए 65 वर्षीय शीतला सहाय खरे को ही ले लीजिए परिजनों के अनुसार उनके चाचा को बीते 2 दिन से सांस लेने में दिक्कत थी. परिजन उन्हें कानपुर के कई अस्पतालों में ले गए. पर हर जगह उन्हें कोविड़ रिपोर्ट ना होने का बहाना बनाकर वापस लौटा दिया गया. किसी ने उन्हें देखा तक नहीं. थक हारकर पर उन्हें घर ले आए. ऑक्सीजन की व्यवस्था की. स्थितियों में सुधार होने लगा पर डॉक्टरी चिकित्सक के परामर्श ना मिलने से अनजान परिजनों ने स्थितियों में सुधार देखते हुए ऑक्सीजन हटा दी. दूसरे दिन सुबह अचानक वृद्ध की तबीयत बिगड़ी और कुछ देर बाद उनकी सांसें थम गई. यह स्थिति केवल शीतला सहाय की ही नहीं थी गांव में मृत्यु का शिकार हुए नम्हकू लाल, सुभाष पांडे, शिव कुमार पांडे ,लाला साहू, सुंदर कुशवाहा, अयोध्या कुशवाहा, जमील, सत्तार, असलम, कल्लू, राजा यादव, दशरथ सोनकर, मोती लाल सोनकर, रामाश्रय यादव, अर्चना कुशवाहा सभी इन स्थितियों से दो चार हुये और मृत्यु को प्राप्त हुए . जहांगीराबाद के ही मजरा रहेमपुर में भी यही हालात है. प्रधान भी अभी-अभी निर्वाचन होने की वजह से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहें है. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने परास, जहांगीराबाद ही नहीं तहसील क्षेत्र के अधिकतर गांव के लोगों की जान खतरे में डाले हुए हैं. ग्रामीण बताते हैं कि जहांगीराबाद गांव में 3-3,4-4 लोगों की मृत्यु हुई है पर इन सब के बावजूद स्वास्थ्य विभाग सोया हुआ है।
कानपुर से जिला संवाददाता विक्रम सिंह की रिपोर्ट

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