प्रवासी कामगारों के साथ परिवार नियोजन की जरूरत पर हो रही चर्चा

0
660

बिहार संवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट

प्रवासी कामगारों के साथ परिवार नियोजन की जरूरत पर हो रही चर्चा
• परिवार नियोजन के अस्थायी साधन कराये जा रहे हैं उपलब्ध
• जिला के सभी प्रखंडों में चलाया जा रहा है मिशन मोड में कार्य
पटना / 2 जून : स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संकटकाल में भी परिवार नियोजन की जरूरत को ध्यान में रखा है। अपने गृह जिला लौटने के बाद क्वारेंटीन किये गये प्रवासी कामगारों को 14 दिनों की अवधि पूरा करा कर घर वापस भेजा जा रहा है। उनके घर लौटने के बाद अब आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से उन्हें परिवार नियोजन की जानकारी भी दी जा रही है।उन्हें परिवार नियोजन की आवश्यकता पर जागरूक करने के साथ ही अस्थायी साधन भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था केयर इंडिया की देखरेख में इस कार्य को जिला में इस कार्य को इंटेसिव मोड में चलाया जा रहा है।
सिविल सर्जन  राजकिशोर चौधरी ने बताया जिला में बड़ी संख्या में प्रवासी कामगारों का लौटना जारी है।उनके अपने गृह जिला आने के बाद 14 दिनों के लिए क्वारेंटीन सेंटर में रखा जा रहा है। इसके बाद उन्हें घर भेज दिया जा रहा है।इस दौरान प्रवासी कामगारों सहित उनकी परिवार को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करने की जरूरत को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभियान चलाया गया है. यह वह समय है जब प्रवासी कामगार अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता रहे होंगे।आशा व आंगनबाड़ी सेविकाएं चिन्हित प्रवासी कामगारों के घरों पर जाकर दंपति को परिवार नियोजन की आर्थिक व सामाजिक प्रभाव पर चर्चा कर रही हैं। साथ ही उन्हें अस्थायी परिवार नियोजन के साधनों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चार प्रकार के अस्थायी साधन है मौजूद:
सिविल सर्जन ने बताया प्रवासी कामगारों को उनकी पत्नी की मौजूदगी में इन बातों की जानकारी देने के साथ उन्हें कंडोम, माला एन, छाया, ईजी पिल्स, जैसे अस्थायी साधन मुहैया कराये जा रहे हैं।
इस दौरान ऐसी दंपति को लक्षित किया गया है जिनके संतान नहीं हैं या एक संतान हैं। उन दंपति को जिनकी संतान नहीं हैं उन्हें इस बात की जानकारी दी गयी है कि वे कितने अवधि के बाद संतान चाहते हैं और जब तक वे संतान नहीं चाहते हैं वे अस्थायी साधन का इस्तेमाल कर सकते हैं।वैसे दंपति जिन्हें एक बच्चा है उनके लिए दूसरी संतान के लिए तीन साल का अंतर रखना जरूरी है। इस दौरान वे अस्थायी परिवार नियोजन के साधन का इस्तेमाल करना बेहतर है।
परिवार नियोजन के साथ साथ दी जा रही है स्वच्छता की सीख:
सप्ताह में दो दिन की मियाद तय कर आशा एवं स्वास्थ्यकर्मी अपने अपने क्षेत्र में स्थित क्वारंटाइन सेंटर में जा रहे हैं। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए सेंटर में रह रहे प्रवासियों को स्वच्छता के महत्त्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। स्वच्छता अपनाकर कोरोना के संक्रमण से बचाव की जानकारी दी जा रही है और परिवार नियोजन के साधन अपनाने की भी सलाह दी जा रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here