बिहार संंवाददाता सिकंदर राय कि रिपोर्ट कोरोना को मात देने वाले लोग स्नेह के हैं हक़दार,

0
207

कोरोना को मात देने वाले लोग स्नेह के हैं हक़दार, भेदभाव अधूरी जानकारी की पहकोरोना को मात देने वाले लोग स्नेह के हैं हक़दार, भेदभाव अधूरी जानकारी की पहचान

• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बचाव की दी जानकारी
• होगी 6 फीट की दूरी, तभी कोरोना से बचाव होगी पूरी
• तंबाकू सेवन से करें परहेज, रहें स्वस्थ

पूर्णियाँ/ 10 जून:

कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन में फ़िलहाल तो कुछ छूट दी गयी है एवं अनलॉक 1.0 को देशभर में लागू कर दिया गया है. लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी ही देखी जा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने विडियो जारी कर अनलॉक 1.0 के दौरान कोरोना से बचाव की उपायों की जानकारी दी है. साथ ही कोरोना से ग्रसित लोग, कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोग एवं कोरोना पीडतों की देखभाल में जुटे चिकित्सक या अन्य कर्मियों के खिलाफ़ हो रहे भेदभाव के विषय में भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है. कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों के प्रति भेदभाव समुदाय में सही जानकारी के आभाव को दर्शाता है. बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जो ठीक होने के बाद कोरोना पीड़ितों के उपचार के लिए प्लाज्मा डोनेट भी कर रहे हैं. इसलिए वे भेदभाव नहीं बल्कि स्नेह के हक़दार हैं.

कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोगों से नहीं करें भेदभाव :

‘‘जब से कोरोना से ठीक होकर अस्पताल से लौटी हूँ. पड़ोसी मेरे साथ कुछ अजीब ही व्यवहार कर रहे हैं. घर वालों के पास भी कोई विकल्प नहीं है. सभी घर में ही कैद रहने को मजबूर हैं’’

‘‘मैं अब बिलकुल ठीक हो चुकी हूँ. लेकिन घर वापस लौटने के बाद यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है. आस-पास के लोग तो मुझे पानी भी भरने नहीं देते. यह भेदभाव ठीक नहीं है’’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना को मात देकर घर लौटी कुछ महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर उनकी बातों को विडियो के माध्यम से साझा किया है. साथ ही एम्स दिल्ली के निदेशक एवं चिकित्सकों ने भी इस पर अपनी राय भी रखी है.
एम्स. दिल्ली, के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कोरोना भी एक आम वायरल रोग है. यद्यपि बाकी वायरल रोगों की तुलना में इसका प्रसार तेज है. बहुत सारे कोरोना के ऐसे भी मरीज हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं है एवं वे आसानी से ठीक भी हो रहे हैं. लेकिन ठीक होने के बाद लोग उनसे दूर भागने लगते हैं एवं उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो वैज्ञानिक रूप से बिलकुल गलत है. ठीक हुए मरीजों से कोरोना का संक्रमण दूसरे लोगों में नहीं फ़ैलता है. उन्होंने बताया भेदभाव के ही कारण बहुत सारे लोग पीड़ित होकर भी जाँच के लिए सामने नहीं आते हैं. इससे उनकी जान को खतरा है.

एम्स. दिल्ली, के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौशल सिन्हा देव बताते हैं, कोरोना ने लोगों को डरा दिया है. इस डर के कारण लोगों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है. लोगों को लगता है कि जो भी लोग कोरोना से लड़ रहे हैं या जो लोग कोरोना को हराकर ठीक हो चुके हैं उनसे दूरी बनाकर कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है. लेकिन सत्य यह है कि लोगों से भेदभाव करके एवं कोरोना की जंग में शामिल लोगों पर ऊँगली उठाकर इस महामारी से बचा नहीं जा सकता है.

इन बातों का रखें विशेष ख्याल:

• सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनायें.
• घर में बने पुनः उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें.
• अपनी आँख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ़ करें या आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें.
• तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, ना ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें.
• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें.
• अनावश्यक यात्रा न करें.
• यदि सामाजिक समारोह स्थगित नहीं किया जा सकता, तो मेहमानों की संख्या कम से कम रखें.
• कोविड-19 पर जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क करें.चान

• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बचाव की दी जानकारी
• होगी 6 फीट की दूरी, तभी कोरोना से बचाव होगी पूरी
• तंबाकू सेवन से करें परहेज, रहें स्वस्थ

पूर्णियाँ/ 10 जून:

कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन में फ़िलहाल तो कुछ छूट दी गयी है एवं अनलॉक 1.0 को देशभर में लागू कर दिया गया है. लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी ही देखी जा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने विडियो जारी कर अनलॉक 1.0 के दौरान कोरोना से बचाव की उपायों की जानकारी दी है. साथ ही कोरोना से ग्रसित लोग, कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोग एवं कोरोना पीडतों की देखभाल में जुटे चिकित्सक या अन्य कर्मियों के खिलाफ़ हो रहे भेदभाव के विषय में भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है. कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों के प्रति भेदभाव समुदाय में सही जानकारी के आभाव को दर्शाता है. बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जो ठीक होने के बाद कोरोना पीड़ितों के उपचार के लिए प्लाज्मा डोनेट भी कर रहे हैं. इसलिए वे भेदभाव नहीं बल्कि स्नेह के हक़दार हैं.

कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोगों से नहीं करें भेदभाव :

‘‘जब से कोरोना से ठीक होकर अस्पताल से लौटी हूँ. पड़ोसी मेरे साथ कुछ अजीब ही व्यवहार कर रहे हैं. घर वालों के पास भी कोई विकल्प नहीं है. सभी घर में ही कैद रहने को मजबूर हैं’’

‘‘मैं अब बिलकुल ठीक हो चुकी हूँ. लेकिन घर वापस लौटने के बाद यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है. आस-पास के लोग तो मुझे पानी भी भरने नहीं देते. यह भेदभाव ठीक नहीं है’’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना को मात देकर घर लौटी कुछ महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर उनकी बातों को विडियो के माध्यम से साझा किया है. साथ ही एम्स दिल्ली के निदेशक एवं चिकित्सकों ने भी इस पर अपनी राय भी रखी है.
एम्स. दिल्ली, के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कोरोना भी एक आम वायरल रोग है. यद्यपि बाकी वायरल रोगों की तुलना में इसका प्रसार तेज है. बहुत सारे कोरोना के ऐसे भी मरीज हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं है एवं वे आसानी से ठीक भी हो रहे हैं. लेकिन ठीक होने के बाद लोग उनसे दूर भागने लगते हैं एवं उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो वैज्ञानिक रूप से बिलकुल गलत है. ठीक हुए मरीजों से कोरोना का संक्रमण दूसरे लोगों में नहीं फ़ैलता है. उन्होंने बताया भेदभाव के ही कारण बहुत सारे लोग पीड़ित होकर भी जाँच के लिए सामने नहीं आते हैं. इससे उनकी जान को खतरा है.

एम्स. दिल्ली, के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौशल सिन्हा देव बताते हैं, कोरोना ने लोगों को डरा दिया है. इस डर के कारण लोगों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है. लोगों को लगता है कि जो भी लोग कोरोना से लड़ रहे हैं या जो लोग कोरोना को हराकर ठीक हो चुके हैं उनसे दूरी बनाकर कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है. लेकिन सत्य यह है कि लोगों से भेदभाव करके एवं कोरोना की जंग में शामिल लोगों पर ऊँगली उठाकर इस महामारी से बचा नहीं जा सकता है.

इन बातों का रखें विशेष ख्याल:

• सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनायें.
• घर में बने पुनः उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें.
• अपनी आँख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ़ करें या आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें.
• तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, ना ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें.
• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें.
• अनावश्यक यात्रा न करें.
• यदि सामाजिक समारोह स्थगित नहीं किया जा सकता, तो मेहमानों की संख्या कम से कम रखें.
• कोविड-19 पर जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क करें.प्रवासियों को कार्य उपलब्ध कराने को लेकर लेकर पनोरमा निर्देशक ने आयोजित किया रोजगार मेला, प्रवासियों में खुशी
छातापुर।सुपौल।संजय कुमार भगत
राज्य में कोरोना आपदा के इस दौर में जब प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ऐसे विपरीत समय में स्थानीय संजीव मिश्रा ने रोजगार मेला का आयोजन कर प्रवासियों को रोजगार मुहैया करा रही है।
जानकारी हो कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र के रामपुर पंचायत स्थित पनोरमा पब्लिक स्कूल परिसर में प्रवासियों के लिए रोजगार मेला का आयोजन किया गया। पनोरमा ग्रूप पूर्णिया के निदेशक संजीव मिश्रा की मौजूदगी में लगे मेले में प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्यां में रोजगार के लिए प्रवासी मजदूर पहुँचे। जहां स्टाॅल लगाकर करीब एक सौ प्रवासियों का केटेगरी वाईज रजिष्ट्रेशन किया गया। इस मौके पर निदेशक श्री मिश्रा ने बताया कि पनोरमा ग्रूप पूर्णिया छातापुर विधानसभा क्षेत्र के एक हजार हुनरमंद प्रवासियों को रोजगार देने के प्रयास में है। बाहरी प्रदेशों के अनुरूप ही मजदूरी पर काम दिया जाएगा। उनका प्रयास है कि इस इलाके के बेरोजगारों को रोजी रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में नहीं जाना पङे, जो प्रवासी जिस विधा में हुनर रखते हैं उसे उसी में रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा विभिन्न कार्य के निमित प्रवासियों को आमंत्रित किया है। जिसमे
इलेक्ट्रिशियन,पलंबर, सुरक्षा गार्ड, गनमेन, सुपरवाईजर, राजमिस्त्री, एकाउंट, प्रोजेक्ट मैनेजर, सेल्स एण्ड मार्केटिंग आदि क्षेत्र में कार्य दिया जाएगा। इसके साथ ही उक्त कार्य को सीखने के इच्छुक क्षेत्र के प्रवासियों को भी सीखने के कार्य के निमित रोजगार देना सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि छातापुर प्रखंड के बाद छातापुर विधान सभा क्षेत्र के बसंतपुर, बीरपुर व भीमनगर में भी तारीख निर्धारित कर रोजगार मेला लगाकर कामगारों का पंजियन किया जाएगा। जिसके बाद 30 जून को कैंप लगाकर साक्षात्कार होगी, उसके बाद पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दे दिया जाएगा।
श्री मिश्रा ने बताया कि इच्छूक प्रवासियों को हुनर का प्रशिक्षण भी दिये जाने की व्यवस्था की गई है। कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के कारण बाहरी प्रदेशों में काम करने वाले कामगारों के घर आ जाने से बेरोजगारी के कारण कई मजदूरों को विकट परिस्थितियों का सामना करना पङा है, उनका प्रयास है कि वैसे कामगारों को पूर्णियां सहित स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके,साथ ही कहा गया कि जो भी प्रवासी रोजगार मेला में सामिल नहीं हो पाये वे पनोरमा पब्लिक स्कूल पहूंचकर संपर्क कर सकते हैं। मौके पर संस्था के सीईओ एएन ठाकुर, तौसिफ हसन, बबलु कुसियैत, ललन भगत आदि मौजूद थे ।श्री मिश्रा के इस पहल से स्थानीय बेरोजगारों में उम्मीद की किरण जागी है। और प्रवासियों में खुशी दिखी।पर हुई सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत

• गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व सभी प्रकार की जांच
• कोरोना काल के कारण स्थगित कर दी गई थी सेवा
• जांच के दौरान सोशल डिस्टेनसिंग का रखा गया खयाल

पूर्णियाँ : 09 जून

कोरोना काल से उबरते हुए सिविल सर्जन के आदेश से सभी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत की गई. इसके तहत दूसरी और तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व होने वाले सभी प्रकार की जांच की गई. इस दौरान अस्पतालों को अच्छी तरह से सजाया गया व जांच के समय सोशल डिस्टेनसिंग का खयाल रखा गया. ज्ञात हो कि कोविड-19 से पहले प्रत्येक माह की निश्चित नवीं तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत दूसरी और तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं की व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करने के लिए जांच कराई जाती थी, जो कोरोना काल के दौरान बन्द कर दी गई थी. इसकी पुनः शुरुआत करते हुए जिले के सभी अस्पतालों में इसकी शुरुआत की गई.

गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व सभी प्रकार की जांच :
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व के सभी प्रकार की जांच की गई. इस दौरान उनकी ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर, हेमोग्लोबिन व अल्ट्रासाउंड की जांच हुई. जांच के बाद समय पर रिपोर्ट देने के साथ ही गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान रखने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया गया.

कोरोना काल के दौरान स्थगित कर दिया गया था अभियान :
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रत्येक माह की नवीं तारीख को सभी अस्पतालों में चलाया जाता है, परन्तु पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण के बढ़ने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था. इस दौरान अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच नहीं कराई जा रही थी. हालांकि इस दौरान सभी आशाओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा घर-घर जाकर उनकी देख-भाल की जा रही थी. उसके स्वास्थ्य की नियमित जांच के साथ ही उन्हें कोरोना से बचने, साफ-सफाई पर ध्यान देने, पौष्टिक आहार लेने आदि की जानकारी दी जा रही थी. जोखिम वाले गर्भवती महिलाओं के लिए पहले से अस्पताल को सूचित करने के साथ ही एम्बुलेंस का तैयार रखना, समय-समय पर उनका हाल-चाल लेना आदि आशाओं व सेविकाओं द्वारा नियमित तौर पर किया जा रहा था.

सजाया गया था सभी अस्पताल :
अभियान की दुबारा शुरुआत के लिए सभी अस्पतालों को अच्छी तरह से सजाया गया. इस दौरान अस्पताल कक्ष में गुब्बारे लगाए गए. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था अस्पतालों में कई गई. जांच के दौरान सोशल डिस्टेनसिंग का भी ध्यान रखा गया. सभी अस्पताल कर्मचारियों ने मास्क, ग्लब्स आदि पहन कर जांच कक्ष में उपस्थित रहे.

गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें विशेष ध्यान:

• तनाव मुक्त रहें एवं रात में अच्छी नींद लें.
• आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें. दाल, हरी सब्जियां, कोरोना को मात देने वाले लोग स्नेह के हैं हक़दार, भेदभाव अधूरी जानकारी की पहचान

• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बचाव की दी जानकारी
• होगी 6 फीट की दूरी, तभी कोरोना से बचाव होगी पूरी
• तंबाकू सेवन से करें परहेज, रहें स्वस्थ

पूर्णियाँ/ 10 जून:

कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन में फ़िलहाल तो कुछ छूट दी गयी है एवं अनलॉक 1.0 को देशभर में लागू कर दिया गया है. लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी ही देखी जा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने विडियो जारी कर अनलॉक 1.0 के दौरान कोरोना से बचाव की उपायों की जानकारी दी है. साथ ही कोरोना से ग्रसित लोग, कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोग एवं कोरोना पीडतों की देखभाल में जुटे चिकित्सक या अन्य कर्मियों के खिलाफ़ हो रहे भेदभाव के विषय में भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है. कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों के प्रति भेदभाव समुदाय में सही जानकारी के आभाव को दर्शाता है. बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जो ठीक होने के बाद कोरोना पीड़ितों के उपचार के लिए प्लाज्मा डोनेट भी कर रहे हैं. इसलिए वे भेदभाव नहीं बल्कि स्नेह के हक़दार हैं.

कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोगों से नहीं करें भेदभाव :

‘‘जब से कोरोना से ठीक होकर अस्पताल से लौटी हूँ. पड़ोसी मेरे साथ कुछ अजीब ही व्यवहार कर रहे हैं. घर वालों के पास भी कोई विकल्प नहीं है. सभी घर में ही कैद रहने को मजबूर हैं’’

‘‘मैं अब बिलकुल ठीक हो चुकी हूँ. लेकिन घर वापस लौटने के बाद यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है. आस-पास के लोग तो मुझे पानी भी भरने नहीं देते. यह भेदभाव ठीक नहीं है’’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना को मात देकर घर लौटी कुछ महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर उनकी बातों को विडियो के माध्यम से साझा किया है. साथ ही एम्स दिल्ली के निदेशक एवं चिकित्सकों ने भी इस पर अपनी राय भी रखी है.
एम्स. दिल्ली, के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कोरोना भी एक आम वायरल रोग है. यद्यपि बाकी वायरल रोगों की तुलना में इसका प्रसार तेज है. बहुत सारे कोरोना के ऐसे भी मरीज हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं है एवं वे आसानी से ठीक भी हो रहे हैं. लेकिन ठीक होने के बाद लोग उनसे दूर भागने लगते हैं एवं उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो वैज्ञानिक रूप से बिलकुल गलत है. ठीक हुए मरीजों से कोरोना का संक्रमण दूसरे लोगों में नहीं फ़ैलता है. उन्होंने बताया भेदभाव के ही कारण बहुत सारे लोग पीड़ित होकर भी जाँच के लिए सामने नहीं आते हैं. इससे उनकी जान को खतरा है.

एम्स. दिल्ली, के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौशल सिन्हा देव बताते हैं, कोरोना ने लोगों को डरा दिया है. इस डर के कारण लोगों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है. लोगों को लगता है कि जो भी लोग कोरोना से लड़ रहे हैं या जो लोग कोरोना को हराकर ठीक हो चुके हैं उनसे दूरी बनाकर कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है. लेकिन सत्य यह है कि लोगों से भेदभाव करके एवं कोरोना की जंग में शामिल लोगों पर ऊँगली उठाकर इस महामारी से बचा नहीं जा सकता है.

इन बातों का रखें विशेष ख्याल:

• सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनायें.
• घर में बने पुनः उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें.
• अपनी आँख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ़ करें या आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें.
• तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, ना ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें.
• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें.
• अनावश्यक यात्रा न करें.
• यदि सामाजिक समारोह स्थगित नहीं किया जा सकता, तो मेहमानों की संख्या कम से कम रखें.
• कोविड-19 पर जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क करें.प्रवासियों को कार्य उपलब्ध कराने को लेकर लेकर पनोरमा निर्देशक ने आयोजित किया रोजगार मेला, प्रवासियों में खुशी
छातापुर।सुपौल।संजय कुमार भगत
राज्य में कोरोना आपदा के इस दौर में जब प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ऐसे विपरीत समय में स्थानीय संजीव मिश्रा ने रोजगार मेला का आयोजन कर प्रवासियों को रोजगार मुहैया करा रही है।
जानकारी हो कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र के रामपुर पंचायत स्थित पनोरमा पब्लिक स्कूल परिसर में प्रवासियों के लिए रोजगार मेला का आयोजन किया गया। पनोरमा ग्रूप पूर्णिया के निदेशक संजीव मिश्रा की मौजूदगी में लगे मेले में प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्यां में रोजगार के लिए प्रवासी मजदूर पहुँचे। जहां स्टाॅल लगाकर करीब एक सौ प्रवासियों का केटेगरी वाईज रजिष्ट्रेशन किया गया। इस मौके पर निदेशक श्री मिश्रा ने बताया कि पनोरमा ग्रूप पूर्णिया छातापुर विधानसभा क्षेत्र के एक हजार हुनरमंद प्रवासियों को रोजगार देने के प्रयास में है। बाहरी प्रदेशों के अनुरूप ही मजदूरी पर काम दिया जाएगा। उनका प्रयास है कि इस इलाके के बेरोजगारों को रोजी रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में नहीं जाना पङे, जो प्रवासी जिस विधा में हुनर रखते हैं उसे उसी में रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा विभिन्न कार्य के निमित प्रवासियों को आमंत्रित किया है। जिसमे
इलेक्ट्रिशियन,पलंबर, सुरक्षा गार्ड, गनमेन, सुपरवाईजर, राजमिस्त्री, एकाउंट, प्रोजेक्ट मैनेजर, सेल्स एण्ड मार्केटिंग आदि क्षेत्र में कार्य दिया जाएगा। इसके साथ ही उक्त कार्य को सीखने के इच्छुक क्षेत्र के प्रवासियों को भी सीखने के कार्य के निमित रोजगार देना सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि छातापुर प्रखंड के बाद छातापुर विधान सभा क्षेत्र के बसंतपुर, बीरपुर व भीमनगर में भी तारीख निर्धारित कर रोजगार मेला लगाकर कामगारों का पंजियन किया जाएगा। जिसके बाद 30 जून को कैंप लगाकर साक्षात्कार होगी, उसके बाद पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दे दिया जाएगा।
श्री मिश्रा ने बताया कि इच्छूक प्रवासियों को हुनर का प्रशिक्षण भी दिये जाने की व्यवस्था की गई है। कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के कारण बाहरी प्रदेशों में काम करने वाले कामगारों के घर आ जाने से बेरोजगारी के कारण कई मजदूरों को विकट परिस्थितियों का सामना करना पङा है, उनका प्रयास है कि वैसे कामगारों को पूर्णियां सहित स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके,साथ ही कहा गया कि जो भी प्रवासी रोजगार मेला में सामिल नहीं हो पाये वे पनोरमा पब्लिक स्कूल पहूंचकर संपर्क कर सकते हैं। मौके पर संस्था के सीईओ एएन ठाकुर, तौसिफ हसन, बबलु कुसियैत, ललन भगत आदि मौजूद थे ।श्री मिश्रा के इस पहल से स्थानीय बेरोजगारों में उम्मीद की किरण जागी है। और प्रवासियों में खुशी दिखी।पर हुई सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत

• गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व सभी प्रकार की जांच
• कोरोना काल के कारण स्थगित कर दी गई थी सेवा
• जांच के दौरान सोशल डिस्टेनसिंग का रखा गया खयाल

पूर्णियाँ : 09 जून

कोरोना काल से उबरते हुए सिविल सर्जन के आदेश से सभी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत की गई. इसके तहत दूसरी और तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व होने वाले सभी प्रकार की जांच की गई. इस दौरान अस्पतालों को अच्छी तरह से सजाया गया व जांच के समय सोशल डिस्टेनसिंग का खयाल रखा गया. ज्ञात हो कि कोविड-19 से पहले प्रत्येक माह की निश्चित नवीं तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत दूसरी और तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं की व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करने के लिए जांच कराई जाती थी, जो कोरोना काल के दौरान बन्द कर दी गई थी. इसकी पुनः शुरुआत करते हुए जिले के सभी अस्पतालों में इसकी शुरुआत की गई.

गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व सभी प्रकार की जांच :
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व के सभी प्रकार की जांच की गई. इस दौरान उनकी ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर, हेमोग्लोबिन व अल्ट्रासाउंड की जांच हुई. जांच के बाद समय पर रिपोर्ट देने के साथ ही गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान रखने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया गया.

कोरोना काल के दौरान स्थगित कर दिया गया था अभियान :
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रत्येक माह की नवीं तारीख को सभी अस्पतालों में चलाया जाता है, परन्तु पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण के बढ़ने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था. इस दौरान अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच नहीं कराई जा रही थी. हालांकि इस दौरान सभी आशाओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा घर-घर जाकर उनकी देख-भाल की जा रही थी. उसके स्वास्थ्य की नियमित जांच के साथ ही उन्हें कोरोना से बचने, साफ-सफाई पर ध्यान देने, पौष्टिक आहार लेने आदि की जानकारी दी जा रही थी. जोखिम वाले गर्भवती महिलाओं के लिए पहले से अस्पताल को सूचित करने के साथ ही एम्बुलेंस का तैयार रखना, समय-समय पर उनका हाल-चाल लेना आदि आशाओं व सेविकाओं द्वारा नियमित तौर पर किया जा रहा था.

सजाया गया था सभी अस्पताल :
अभियान की दुबारा शुरुआत के लिए सभी अस्पतालों को अच्छी तरह से सजाया गया. इस दौरान अस्पताल कक्ष में गुब्बारे लगाए गए. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था अस्पतालों में कई गई. जांच के दौरान सोशल डिस्टेनसिंग का भी ध्यान रखा गया. सभी अस्पताल कर्मचारियों ने मास्क, ग्लब्स आदि पहन कर जांच कक्ष में उपस्थित रहे.

गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें विशेष ध्यान:

• तनाव मुक्त रहें एवं रात में अच्छी नींद लें.
• आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें. दाल, हरी सब्जियां, प्रवासियों को कार्य उपलब्ध कराने को लेकर लेकर पनोरमा निर्देशक ने आयोजित किया रोजगार मेला, प्रवासियों में खुशी
छातापुर।सुपौल।संजय कुमार भगत
राज्य में कोरोना आपदा के इस दौर में जब प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ऐसे विपरीत समय में स्थानीय संजीव मिश्रा ने रोजगार मेला का आयोजन कर प्रवासियों को रोजगार मुहैया करा रही है।
जानकारी हो कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र के रामपुर पंचायत स्थित पनोरमा पब्लिक स्कूल परिसर में प्रवासियों के लिए रोजगार मेला का आयोजन किया गया। पनोरमा ग्रूप पूर्णिया के निदेशक संजीव मिश्रा की मौजूदगी में लगे मेले में प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्यां में रोजगार के लिए प्रवासी मजदूर पहुँचे। जहां स्टाॅल लगाकर करीब एक सौ प्रवासियों का केटेगरी वाईज रजिष्ट्रेशन किया गया। इस मौके पर निदेशक श्री मिश्रा ने बताया कि पनोरमा ग्रूप पूर्णिया छातापुर विधानसभा क्षेत्र के एक हजार हुनरमंद प्रवासियों को रोजगार देने के प्रयास में है। बाहरी प्रदेशों के अनुरूप ही मजदूरी पर काम दिया जाएगा। उनका प्रयास है कि इस इलाके के बेरोजगारों को रोजी रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में नहीं जाना पङे, जो प्रवासी जिस विधा में हुनर रखते हैं उसे उसी में रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा विभिन्न कार्य के निमित प्रवासियों को आमंत्रित किया है। जिसमे
इलेक्ट्रिशियन,पलंबर, सुरक्षा गार्ड, गनमेन, सुपरवाईजर, राजमिस्त्री, एकाउंट, प्रोजेक्ट मैनेजर, सेल्स एण्ड मार्केटिंग आदि क्षेत्र में कार्य दिया जाएगा। इसके साथ ही उक्त कार्य को सीखने के इच्छुक क्षेत्र के प्रवासियों को भी सीखने के कार्य के निमित रोजगार देना सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि छातापुर प्रखंड के बाद छातापुर विधान सभा क्षेत्र के बसंतपुर, बीरपुर व भीमनगर में भी तारीख निर्धारित कर रोजगार मेला लगाकर कामगारों का पंजियन किया जाएगा। जिसके बाद 30 जून को कैंप लगाकर साक्षात्कार होगी, उसके बाद पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दे दिया जाएगा।
श्री मिश्रा ने बताया कि इच्छूक प्रवासियों को हुनर का प्रशिक्षण भी दिये जाने की व्यवस्था की गई है। कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के कारण बाहरी प्रदेशों में काम करने वाले कामगारों के घर आ जाने से बेरोजगारी के कारण कई मजदूरों को विकट परिस्थितियों का सामना करना पङा है, उनका प्रयास है कि वैसे कामगारों को पूर्णियां सहित स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके,साथ ही कहा गया कि जो भी प्रवासी रोजगार मेला में सामिल नहीं हो पाये वे पनोरमा पब्लिक स्कूल पहूंचकर संपर्क कर सकते हैं। मौके पर संस्था के सीईओ एएन ठाकुर, तौसिफ हसन, बबलु कुसियैत, ललन भगत आदि मौजूद थे ।श्री मिश्रा के इस पहल से स्थानीय बेरोजगारों में उम्मीद की किरण जागी है। और प्रवासियों में खुशी दिखी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here