बुधवार से जेई टीकाकरण अभियान होगा शुरू: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी

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बिहार संंवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट:-

सहरसा -16 जून: कोरोना महामारी के बीच बच्चों को जेई से बचाव की मुहिम शुरू की जा रही है. इसको लेकर जिले में जेई टीकाकरण अभियान का प्रारंभ जिले में बुधवार से हो रहा है।
★ जिले मे 287409 बच्चे को लगया जाऐगा टीका
★ 17 जून से शुरू होगा टीकाकरण

1 साल से 15 साल तक के बच्चों को लगेगा टीका:

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. कुमार विवेकानंद ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार स्कूल बंद है. इसलिए सभी पीएचसी स्तर पर सेशन साइट आयोजित कर बच्चे का टीकाकरण किया जाएगा। जापानी इंन्सेफलाइटिस वायरस का संक्रमण इस मौसम प्रत्येक वर्ष सामने आ रहा है। इसमें एक वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं। खासकर मानसिक विकलांगता और पक्षाघात तक हो सकता है। यह बीमारी संक्रमित क्युलेक्स मच्छरों के काटने से होता है। क्युलेक्स मच्छर जल जमाव वाले नाले, तालाबों, धान के खेतों में रहता है। जिस क्षेत्र में सुअर का पालन ज्यादा होता है यह वायरस उसी क्षेत्र में पाया जाता है। क्युलेक्स मच्छर सुअर से संक्रमित होकर मनुष्यों में संक्रमण फैलाता है। चिकित्सक जापानी इंसेफलाइटिस बीमारी की रोकथाम और पूर्ण नियंत्रण के लिए जेई वैक्सीन का टीका एक सरल और सर्वोतम उपाय है। यह टीका एक वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चों को देने का लक्ष्य रखा गया है। टीका मांसपेशी में लगाया जाता है। 17 जून से इस अभियान का प्रारंभ किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण सभी स्कूल बंद है इसलिए नियमित टीकाकरण सत्रों को बढ़ाकर टीका लगाया जाएगा।

एएनएम के पास होगा किट:

क्षेत्र के 1 से 5 वर्ष के सभी बच्चे साथ ही स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को टीका दिया जाना है। शिक्षण संस्थान खुलने के बाद यह टीकाकरण सभी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दिया जाएगा। कोरोना के मद्देनजर टीकाकरण के दिन दो गज की सामाजिक दूरी का पूर्णत: पालन करते हुए टीकाकरण किया जाएगा और बच्चों को एक कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। जेई वैक्सीन से सूई वाले स्थान पर थोड़ा दर्द और लालिमा हो सकती है। फिर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए प्रत्येक प्रखंड पर मोबाइल मेडिकल टीम सभी आवश्यक दवाओं और एंबुलेंस के साथ टीम गठित किया गया है। इसके अलावा सभी एएनएम के पास किट उपलब्ध होगा।

इस मौसम में बच्चे को लेकर अभिभावक सतर्क रहें

• तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोंछे

• पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100 फोरहाइट से कम हो जाए

• पारासिटामोल की गोली मरीज को चिकित्सकीय सलाह पर दें

• अगर बच्चा बेहोश नहीं है तो साफ पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलाएं

• बच्चे को खाली पेट लीची न खिलायें, अधपके अथवा कच्चे लिची का सेवन नहीं करें

• बच्चे को कंबल और गर्म कपड़े में नहीं लपेटें। बच्चे की नाक बंद नहीं करें

• बच्चे को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलाएं

• सरदर्द या तेज बुखार होने पर 5-7 दिनों से ज्यादा ना हो

• शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना आदि है।

• इस काम मे पाथ, युनिसेफ, केयर डंडिया, डब्ल्यूएचओ कथा इत्यादि संस्था सहयोग कर रही है

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