भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है

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भारत सरकार में अगर हिम्मत है तो उसको चाहिए एक ऐसा बिल पास करें ।जिससे हमारे मन्दिरों- मस्जिदों के चढ़ावो का 50% हर माह हमारे देश का कर्ज उतारने एवं कर्ज से मरते किसानों पर सर्वे कराकर मानक के अनुकूल उनको सहायता दे। जिससे किसानों की दशा में सुधार हो और उस पैसे को देस के विकाश पर खर्च करे ख़ासकर शिक्षा एवंम स्वास्थ।

प्राप्त सूचना के आधार पर भारत में कुछ मन्दिरों की
एक महीना की कमाई के ये आंकड़े आपको सोचने को मजबूर कर देंगे-

1. *तिरुपति बालाजी* 1 हजार 325 करोड़
2. *वैष्णौंदेवी* 400 करोड़
3. *रामकृष्ण मिशन* 200 करोड़
4. *जगनाथपुरी* 160 करोड़
5. *शिर्डी सांईबाबा* 100 करोड़
6. *द्वारकाधीश* 50 करोड़
7. *सिद्धी विनायक* 27 करोड़
8. *वैधनाथ धाम देवगढ* 40 करोड़
9. *अंबाजी गुजरात* 40 करोड़
10. *त्रावणकोर* 35 करोड़
11. *अयोध्या* 140 करोड़
12. *काली माता मन्दिर कोलकाता* 250 करोड़
13. *पदमनाभन* 5 करोड़
14. *सालासर बालाजी* 300 करोड़
इसके अलावा *भारत के छोटे बड़े मन्दिरों की सालाना आय 280 लाख करोड़*और *भारत का कुल बजट 15 लाख करोड़।*

*अगर हर आदमी गरीब किसानों की मदद करे तो भारत से गरीबी महज साल भर मे हट सकती है।

याद रहे भगवान तो केवल आपके प्यार का भूखा है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।

*वैसे भी आपके उस पैसे से भगवान नही भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है l*

अगर आप सहमत है और भारत से गरीबी खत्म करना चाहते है …तो सिर्फ पढ़ कर डिलीट ना करें इस पर अमल करने की कोशिश करें । इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश करें । ये एक ऐसा मुद्दा है जिसे कोई भी नेता या राजनीतिक दल उठाने की जुर्रत नहीं करेगा।केवल और केवल आप और हम ही इस जागरूकता अभियान को आगे बढ़ा सकते है ।