मैनपुरी में मनाया गया महत्वपूर्ण पर्व गंगा दशहरा।

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मैनपुरी: गंगा दशहरा हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। गंगा दशहरा निर्जला एकादशी के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 12 जून दिन बुधवार को है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा को एक पर्व की तरह मनाया जाता है। आज दशहरा के महत्वपूर्ण दिन के समय जनपद मैनपुरीं के मैथिल ब्राह्मण जन कल्याण समिति के द्वारा इस भीषण गर्मी के समय मे राहगीरों को ठंडा रूहअफजा मिला जल पिलाया गया। आपको बताते चले कि मैनपुरीं में मैथिल ब्राह्मण जन कल्याण समिति समये समये पर इस तरह के सामाजिक कार्य आम लोगो की भलाई के लिए करती रही है।
इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज इस शुभ दिन पर लोगो को पानी पिला कर इस गर्मी के समय मे कुछ राहत दी है।
आज यह कार्यक्रम मदार दरवाजा रोड पर सुबह 10 बजे से शुरू होकर साम तक चला।इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मैथिल ब्राहण जन कल्याण समिति लोग मौजूद रहे। इस कार्यक्रम को मुख्य रूप से अमलीजामा पहनाने में मैथिल ब्राह्मण जन कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष संजय पारासर की मुख्य भूमिका रही। इस मौक़े पर काफी संख्या में मैथिल ब्राह्मण जन कल्याण समिति के सदश्य व पदाधिकारी मौजूद रहे।

कैसे आई धरती पर गंगा?
माना जाता है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल मां गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थी। जिसके लिए उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। फिर गंगा ने कहा “मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं , लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके। और उसके बाद नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित करा। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई।

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करें इन चीजों का दान 
गंगा दशहरा के दिन किसी भी नदी में स्नान करके दान और तर्पण करने से मनुष्य जाने-अनजाने में किए गए कम से कम दस पापों से मुक्त होता है। इन दस पापों के हरण होने से ही इस तिथि का नाम गंगा दशहरा पड़ा है। गंगा दशहरा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्त्व है। इस दिन दान में सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दुगुना फल प्राप्त होता है।

गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु जन जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए। ऐसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है।

नेशनल एंटी करप्शन न्यूज़ चैनल ब्यूरो चीफ संजय शर्मा फिरोजाबाद