लॉकडाउन की अवधि में जरूरतमंद लोगों के लिए मसीहा बनकर काम कर रहा संगठन

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बिहार संवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट

लॉकडाउन की अवधि में जरूरतमंद लोगों के लिए मसीहा बनकर काम कर रहा कोसी युवा संगठन और जन भोजन कम्युनिटी किचन

सहरसावैश्विक महामारी कोरोना को लेकर सम्पूर्ण देश में सरकार के आदेशानुसार लॉकडाउन लागु है। जहाँ एक तरफ लोग अपनी जान बचाने एवं कोरोना की संक्रमण से बचने के लिए अपने आप को घर में कैद कर लिए हैं वहीं दूसरी तरफ इस लॉकडाउन की अवधि में जरूरतमंद लोगों की मदद कर शहर में सक्रिय दो समाजिक संगठन मानवता की मिशाल पेश कर रहे हैं। कोसी युवा संगठन के संस्थापक सह युवा नेता सोहन झा ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से रोकथाम के लिए देश सहित राज्य में लागु लॉकडाउन की वजह से रोजाना मेहनत-मजदूरी कर कमाने खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला चालकों को खाने -पीने के लाले पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपने साथियों के साथ मिलकर लॉकडाउन के पहले दिन से ज़िले के शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसे परिवारों को चिन्हित कर उनके घर तक लगातार राशन किट पहुँचा रहे है। श्री झा ने बताया कि ज़िले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जो दिहाड़ी मजदूरी कर अपना एवं अपने परिवार का जीवन यापन करते थे ऐसे लोग लागु लॉकडाउन की वजह से दाने दाने के मोहताज हो गए हैं। रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों पर लॉक डाउन का बहुत असर पड़ा है। ऐसे ही लोगों की मदद के लिए हमारे द्वारा संचालित कोशी युवा संगठन के बैनर तले अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर उनके मदद के लिए जरूरी राशन सामाग्री जैसे आटा, चावल, दाल, आलू, सोयाबीन, चना, प्याज़, नमक, तेल, मसाला, छोटे छोटे बच्चों के लिए दुध आदि वितरण कर रहे हैं। साथ ही शहर से दुर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कोरोना वायरस से जागरुक भी करने का काम कर रहे हैं। इस पुनीत कार्य में सोहन झा को रमेश दास, संजू दास, अमर कुमार, रामसागर शर्मा, सोनू मिश्रा, समीर कुमार, रणवीर कुमार सहित अन्य साथियों का भरपूर साथ मिल रहा है। वहीं वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर देश सहित राज्य में लागु लॉकडाउन के दौरान शहर के नगर परिषद क्षेत्र स्थित मीर टोला के अल्पसंख्यक युवाओं ने मिलकर जन भोजन कम्युनिटी किचन की शुरुआत कर भुखे लोगों की भुख मिटाने के लिए दिन-रात एक कर भोजन करा रहे हैं। वे ऐसे लोगों को भोजन करा रहे हैं जिसे कोई देखने वाला नहीं है। रमजान के पवित्र माह में भी इनलोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आयी है। दिनभर रोजा रखने के बाद भी ये लोग पूरी मुस्तैदी से भोजन तैयार कराते हैं और पैकेट बनाकर बाइक से घूम-घूमकर जरूरतमंद लोगों तक पका हुआ खाना पहुंचाते हैं। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करने वाले इन युवाओं का कहना है कि इस संकट की घड़ी में न कोई हिन्दू और न मुसलमान है सभी जरूरतमंद इंसान हैं। भूख से बिलखते लोगों तक रोटी पहुंचाना, आज इंसानियत और मानवता को बचाने की चुनौती है। इस अभियान को गुड्डू हयात, मनहाजुल हसन, मीनू, लुकमान अली, शहनवाज आलम, ताबिस मेहर, शाहिल अहमद, मिनहाज, आफताब, जावेद, रहमतउल्लाह, नकीब अक्कू, शाहरुख मेहर आदि के सामूहिक सहयोग से एक मिशन के तहत रेलवे स्टेशन, यादव टोली, अलीनगर, सराही और मीर टोला में रोज ढ़ाई सौ से अधिक जरूरतमंदों को दोनों वक्त का भोजन दिया जाता है। युवाओं की ये टोली लॉक डाउन के शुरुआती दौर से ही जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुँचाने का काम कर रही है। इन दिनों दोनों सामाजिक संगठनों के चर्चे लोगों के जुबान पर है।

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