स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में करें किशोरियों को जागरूक

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बिहार संवाददाता सिकंदर राय की रिपोर्ट

स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में करें किशोरियों को जागरूक
घर में उपलब्ध साधनों से तैयार करें पोषण की टोकरी
मासिक धर्म स्वच्छता अपनाकर करें संक्रमण से सुरक्षा
पटना/ 4 जून– राष्ट्रिय किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं एनीमिया मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पहली से पांचवी कक्षा तक के बच्चों गुलाबी आयरन फोलिक एसिड की गोली एवं कक्षा छह से बारह तक के किशोर-किशोरियों को नीली आयरन फोलिक एसिड की गोली का वितरण प्रत्येक बुधवार को मध्यान भोजन के पश्चात किया जाता है। वर्तमान में कोविड-19 के संक्रमण के रोकथाम हेतु विद्यालय 15 मार्च से बंद हैं।ऐसी स्थिति में विद्यालय स्तर से साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड गोली अनुपूरण का क्रियान्वयन बाधित है जो बच्चों के पोषण एवं एनीमिया से बचाव हेतु अनुकूल नहीं है।
घर में उपलब्ध साधनों से करें किशोरियों का समुचित पोषण सुनिश्चित:
सिविल सर्जन डॉ. राजकिशोर चौधरी ने बताया हमारे घरों में तमाम तरह की भोजन सामग्री मौजूद रहती है जिसे विविध तरीकों से अपनाकर समुचित पोषण प्राप्त किया जा सकता है। किशोरी बालिका आगे चलकर माँ बनती है इसलिए उनके समुचित पोषण पर ध्यान देना अनिवार्य है।घर में उपलब्ध हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग कर किशोरियों को एनीमिया के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है। दूध से बनी चीजें जैसे दही एवं पनीर से भी समुचित पोषण प्राप्त किया जा सकता है. मौसमी फलों के सेवन भी पोषण एवं एनीमिया प्रबंधन में प्रभावी होता है।किशोरियों में आयरन की कमी से उनके कार्य करने कि क्षमता में कमी,पढाई में ध्यान कि कमी,भूख में कमी,विकास में बाधा,प्रतिरक्षण शक्ति में कमी के साथ किशोरियों में प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ जाती है।
किशोरियों में रक्तअल्पता से होती हैं कई जटिलताएं:
डॉ. चौधरी ने बताया रक्तअल्पता पूरे देश में व्याप्त एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसकी रोकथाम के लिए सभी जरुरी कदम राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाये जा रहे हैं। किशोरियों में एनीमिया के लक्षण आगे चलकर पूरे गर्भकाल एवं प्रसव के दौरान कई जटिलताएं पैदा कर सकते हैं तथा इससे गर्भवती माता तथा नवजात शिशु को विकट स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है.एनीमिया की रोकथाम के लिए उसकी सटीक पहचान तथा उचित प्रबंधन नितांत आवश्यक है तथा इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिलती है।
मासिक धर्म स्वच्छता अपनाकर करें किशोरी स्वयं का संक्रमण से बचाव:
किशोरावस्था में शरीर और मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है।इन बदलावों को समझने और उसे सकारात्मक रूप से लेने के लिए किशोरों को सही सलाह की बहुत जरूरत होती है।11 से 12 साल की किशोरियों में मासिक चक्र की शुरुआत होने लगती ही.बहुत सारी किशोरियों को माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड की जरुरत और महत्व के बारे में सटीक जानकारी नहीं होती है।साथ ही संकोच वश वह इस पर अन्य लोगों से चर्चा भी नहीं कर पाती हैं।यही समय है जब लड़कियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए.इसको लेकर आशा,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम सामुदायिक स्तर पर किशोरियों एवं महिलाओं को निरंतर जागरूक कर रही हैं एवं माहवारी के दौरान असुरक्षित साधनों के इस्तेमाल की जगह सुरक्षित साधन जैसे सेनेटरी पैड अथवा साफ़ सूती कपड़े से बने पैड इस्तेमाल करने की सलाह दे रहीं हैं।

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