15 दिन में 25 से 30 लोगों की मौत से ग्रामीणों मे मचा हड़कंप

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* 15 दिन में 25 से 30 लोगों की मौत से ग्रामीणों मे मचा हड़कंप

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कानपुर घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के परास गांव में बीते 15 दिन में25 से 30 लोगो की कोविड़ एवं कोविड की आशंका से मौत हो गई. जिससे गांव में हड़कंप की स्थिति है. वही गांव में सन्नाटा फैला हुआ है. बताते चलें यह गांव कोतवाली क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम सभा है .अकेले इस गांव की आबादी 10 हजार है कोविड़ के कारण पूरे गांव में हर कोई खौफजदा है कारण गांव में बीते 15 दिन में ही करीब 25 से 30 लोगों की जान चली गई. किसी को 2 दिन पहले बुखार आया .अचानक तबीयत बिगड़ी सांस फूलने लगी. जब तक अस्पताल ले जाते दम तोड़ दिया. कई तो ऐसे हैं दिनभर अस्पताल के बाहर डॉक्टर साहब से दवा लेने के इंतजार में बैठे रहे और शाम तक उनकी सांसे थम गई. गांव निवासी बताते हैं कि गांव के ही राकेश सविता की मौत अचानक आए बुखार के इलाज ना मिलने चलते हो गई .वही सोशल मीडिया में अस्पतालों के हाल देखकर लोगों के पैर ढिढके हुए हैं. मामला केवल राकेश का ही नहीं, अन्य ग्रामीणों के साथ भी यही हो रहा है .राकेश के भतीजे तो सरकारी अस्पतालों की बदहाली को ही बयां कर चाचा की मौत का जिम्मेदार ठहराते हैं. गांव की एक गली में तो एक साथ 8 लोग कोविड़ पॉजिटिव पाए गए. ताजा हालात की बात करें तो अब भी 14 लोग कोविड़ पॉजिटिव है .गांव में ज्यादातर घरों में लोग बीमार है. बुखार खांसी आम है. सांस उखड़ना दमा का रोगी होना सबसे बड़ा अभिशाप है. गांव के एक ही घर के दो सगे भाइयों सत्येंद्र गुप्ता और राजकुमार गुप्ता की कोविड़ की आशंका के चलते मौत हो गई. सत्येंद्र की पत्नी कहती है शाम से ही उसके पति की सांस फूल रही थी. जब तक अस्पताल ले जाते उसकी मौत हो चुकी थी. तो वही राजकुमार का बेटा बताता है कि 5 दिन लगातार दौड़ने के बाद ना कोई सरकारी अस्पताल और ना ही प्राइवेट अस्पताल में कोई ऑक्सीजन सिलेंडर मिला. बड़ी मुश्किल से घर पर ही आक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम करके लेकर आए थे. लेकिन उससे पहले ही पिताजी दम तोड़ चुके थे. स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में टेस्टिंग नहीं हुई है .सरकारी अस्पताल में जिन लोगों की टेस्टिंग में कोविड़ की पुष्टि हुई उनका केवल नाम पता लिखा गया. यहां तक की दवा भी नहीं दी गई और संक्रमित गांव में घूमते रहे .जिससे गांव के 25 से 30 लोगों को 15 दिन के अंदर अपनी जान गवानी पड़ी. ग्रामीण बताते हैं गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का तो 1 साल से ताला ही नहीं खुला और स्वास्थ्य विभाग गांव में झांकने तक नहीं आया. बात जब गांव के निवर्तमान प्रधानपति ओंकार से पूछा गया तो वह अपना ही दुखड़ा लेकर बैठ गए बोले अस्पताल की लापरवाही से मेरे अपने ही रिश्तेदार की ही मृत्यु हो गई. आगे क्या बताएं. लोग आज भी कोविड़ से डरे हुए है. वहीं स्वास्थ्य विभाग जब तक सतर्क हुआ और उसने सैनिटाइजेशन, स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजा तब तक गांव में कई मौतें हो चुकी हैं. वही स्थिति अब भी गंभीर है. संक्रमित लोग गांव में इधर-उधर घूम रहे हैं।
कानपुर से जिला संवाददाता विक्रम सिंह की रिपोर्ट

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